Ishqiyaa Mulaqaat
है जैसे कोई पूरी हुई,
मेरी आज शिव से की बात है।
है जैसे कोई पूरी हुई,
मेरी आज शिव से की बात है...
तू साथ है मेरे पास है,
बड़ी इश्क़िया ये मुलाक़ात है...
चल पड़े हम सफ़र पर नए,
ये सफ़र दिलनशीं है ये जज़्बात हैं...
कोई भी तुम-सा मिला ना कभी भी,
मिली तुम मुझे मानो मैं जी गया।
अधूरा था तुम बिन मैं,
सूखा सरोवर...
तुमसे मिला एक नदी बन गया।
तुम जैसे बारिश की बूंदें बनी हो,
तुम जैसे बारिश की बूंदें बनी हो,
सफ़र आज तुम संग हसीं बन गया...
ये ज़ुल्फ़ें तुम्हारी ये क़ातिल अदाएँ,
ये मदहोश करती घटा छा रही हैं।
मेरी जान तुमसे था कहना ये कब से,
तुम बिन मेरी ये जान जा रही है।
था लगता हमेशा मुझको रहा,
था लगता हमेशा मुझको रहा,
तुमसे ही मेरी कहानी जुड़ी है...
है जैसे कोई पूरी हुई,
मेरी आज शिव से की बात है।
है जैसे कोई पूरी हुई,
मेरी आज शिव से की बात है...
तू साथ है, मेरे पास है,
बड़ी इश्क़िया ये मुलाक़ात है...
चल पड़े हम सफ़र पर नए,
ये सफ़र दिलनशीं है ये जज़्बात हैं...
Ishqiyaa Mulaqaat Written by Pardeep Sharma Reg.SWA
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