Daaru Chhod De
रूप रंग का बेरा कोना
मै दिल तै सुथरी सु
कार वार का ब्योत नही
ऑटो तै उतरी हु
मै आई तेरै बिह्याकै
तनै प्यार करू घी खाकै
मै आई तेरै बिह्याकै
तनै प्यार करू घी खाकै
प्यार करूंगी जितना बोलै
तू लिख कै ले लिए ...
बस दारू छोड़ दे
रै तू दारू छोड़ दे
दारू छोड़ दे
पिया मेरे दारु छोड़ दे...
...
...
काले की बहु , लिले की बहु
छोटे की बहु आई थी ,
बग्गी निचै पड़ा लोग तेरा
बात घणी सुनाई थी
मै सेवा घणी करू सु
तनै खोण तै खसम डरूं सु
तेरी हालत देख नै के होगी
तू खुद न रोक ले ....
बस दारू छोड़ दे
रै तू दारू छोड़ दे
दारू छोड़ दे
पिया मेरे दारु छोड़ दे...
....
...
र जान मेरी ना
रोवै मत ना
ले दारू मै दी
आग लगा
तू दिल मेरा री तनै क्यूकर
दुखी देख लू, मै भला
तू जो बोलै कर दुंगा
ले सारी बोतल फोड़ दी ...
दारू छोड़ दी
मनै दारू छोड़ दी
दारू छोड़ दी
र मनै दारू छोड़ दी...
Daaru Chhod De Written By Pardeep Sharma Reg.SWA
Pardeep 100X
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